सच्चा प्यार क्या होता है What is true love

एक दिन शंकरन पिल्लै बगीचे में गया। वहाँ, पत्थर की बेंच पर एक सुंदर लड़की बैठी थी। वो उसी बेंच पर जा कर बैठ गया। कुछ मिनटों बाद वो लड़की के थोड़ा पास खिसका। वो दूर हो गयी। वह कुछ देर रुका और फिर थोड़ा नज़दीक खिसका। ऐसा करते-करते लड़की बेंच के सिरे तक पहुँच गयी। तब उसने आगे बढ़ कर अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया। लड़की ने उसको धक्का दे कर अलग किया। वो थोड़ी देर वहाँ ऐसे ही बैठा रहा, फिर अपने घुटनों के बल बैठ गया और एक फूल तोड़ कर उसको देते हुए बोला, “मैं तुम्हें प्यार करता हूँ, मैं तुम्हें ऐसे प्यार करता हूँ, जैसा मैंने कभी किसी को नहीं किया है”।

लड़की नरम पड़ गयी। कुदरत ने अपना काम किया और वो दोनों एक दूसरे के नज़दीक आ गये। फिर जब शाम ढल रही थी तो शंकरन पिल्लै उठ कर खड़ा हुआ और बोला, “अब मुझे जाना चाहिये। आठ बज गये हैं और मेरी पत्नी मेरा इंतज़ार कर रही होगी”।

वो बोली, “क्या? तुम जा रहे हो? अभी तो तुमने कहा था कि तुम मुझे प्यार करते हो”!

“हाँ, पर अब वक्त हो गया है और मुझे जाना चाहिये”।

सामान्य रूप से, हम अपने रिश्ते इस तरह से बनाते हैं जो हमारे लिये आरामदायक और फायदेमंद हों। लोगों की शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, आर्थिक या सामाजिक ज़रूरतें होती हैं। इन ज़रूरतों को पूरा करने का सबसे अच्छा तरीका ये हो गया है कि हम लोगों से कहें, “मैं तुम्हें प्यार करता/करती हूँ”। ये तथाकथित प्यार किसी मंत्र के जैसा हो गया है – खुल जा सिमसिम जैसा! इसे कह कर आप वो पाने की कोशिश करते हैं, जो आप चाहते हैं।

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